HINDI QUESTION PART 2

HINDI QUESTION PART 2 



38 मुक्तककार के लक्षण होते है -    
मार्मिकता, कल्पना प्रवण, व्यंग्य प्रयोग, कोमलता, सरलता, नाद सौंदर्य
39 मुक्तक के भेद है -  
रस मुक्तक, सुक्ति मुक्तक
40 काव्य के गुण है -  
  काव्य के रचनात्मक स्वरूप का उन्नयन कर रस को उत्कर्ष प्रदान करने की क्षमता
41 भरत और दण्डी के अनुसार काव्य के गुण के भेद है
-       श्लेष, प्रसाद, समता, समाधि, माधुर्य, ओज, पदसुमारता, अर्थव्यक्ति, उदारता व कांति
42 आचार्य मम्मट ने काव्य गुण बताए -  
  माधुर्य, ओज और प्रसाद
43 माधुर्य गुण में वर्जन है -       ट, ठ, ड, ढ एवं समासयुक्त रचना
44 काव्य दोष वह तत्व है जो रस की हानि करता है। परिभाषा है -  
आचार्य विश्वनाथ की।
45 मम्मट ने काव्य दोष को वर्गीकृत किया -  
  शब्द, अर्थ व रस दोष में
46 श्रुति कटुत्व दोष है -  
जहां परूश वर्णो का प्रयोग होता है।
47 परूष वर्णो का प्रयोग कहां वर्जित है -  
  शृंगार, करूण तथा कोमल भाव की अभिव्यंजना में
48 परूष वर्ग किस अलंकार में वर्जित नहीं है -       यमक आदि में
49 परूष वर्ण कब गुण बन जाते है -  
वीर, रोद्र और कठोर भाव में
50 श्रुतिकटुत्व दोष किस वर्ग में आता है -  
शब्द दोष में
51 काव्य में लोक व्यवहार में प्रयुक्त शब्दों का प्रयोग दोष है -    
ग्राम्यत्व
52 अप्रीतत्व दोष कहलाता है -  
अप्रचलित पारिभाषिक शब्द का प्रयोग। यह एक शास्त्र में प्रसिध्द होता है, लोक में अप्रसिध्द होता है।
53 शब्द का अर्थ बड़ी खींचतान करने पर समझ में आता है उस दोष को कहा जाता है -  
क्लिष्टतव
54 वेद नखत ग्रह जोरी अरघ करि सोई बनत अब खात...। में दोष है -  
  क्लिष्टत्व
55 वाक्य में यथा स्थान क्रम पूर्वक पदो का न होना दोष है -    
अक्रमत्व
56 अक्रमत्व का उदाहरण है -    
सीता जू रघुनाथ को अमल कमल की माल, पहरायी जनु सबन की हृदयावली भूपाल

57 दुष्क्रमत्व दोष होता है -       जहां लोक और शास्त्र के विरूध्द क्रम से वस्तु का वर्णन हो।
58 'आली पास पौढी भले मोही किन पौढन देत' में काव्य दोष है -  
ग्रामयत्व
59 काव्य में पद दोष कितने है -
   16
60 अर्थ दोष कहते है -  
जहां शब्द दोष का निराकरण हो जाए, फिर भी दोष बना रहे वहां अर्थ दोष होता है।
61 वाक्य दोष होते है -    
21 इक्कीस
62 अलंकार के भेद होते है -  
शब्दालंकार, अर्थालंकार, उभयालंकार
63 अलंकार कहते है -    
काव्य की शोभा बढाने वाले को।
64 काव्य में अर्थ द्वारा चमत्कार उत्पन्न करते है उसे कहते है -  
अर्थालंकार
65 मानवीकरण अलंकार किसे कहते है -    
अचेतन अथवा मानवेतर जड़ प्रकृति पर मानव के गुणों एवं कार्य कलापों का आरोप कर उसे मानव सदृश्य सप्राण चित्रित किया जाता है। अमूर्त पदार्थ एवं भावों को मूर्त रूप दिया जाता है।
66 'मुनि तापस जिनते दुख लहही, ते नरेश बिनु पावक दहही' में अलंकार है -  
विभावना
67 जहां वास्तव में विरोध न होने पर भी किंचित विरोध का आभास हो वहां अलंकार होता है -  
विरोधाभास
68 प्रकृति पर मानव व्यवहार का आरोप किया जाता है वहां अलंकार है -  
मानवीकरण
69 'मेघमय आसमान से उतर रही वह संध्या सुंदरी परी सी' में अलंकार है -  
मानवीकरण
70 जहां बिना करण या विपरित कारण के रहते कार्य होने का वर्णन

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