UPSC EXAM महत्वपूर्ण समसामयिकी जनवरी सप्ताह 2017



महत्वपूर्ण समसामयिकी जनवरी सप्ताह 2017



1) तमिलनाडु उदय योजना में शामिल होने वाला 21वां राज्य

राज्य को उदय योजना से लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा
केंद्रीय ऊर्जा, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में उज्ज्वल डिस्कॉम आश्वासन योजना (उदय) के अंतर्गत बिजली वितरण कंपनी के संचालन और वित्तीय कायाकल्प के लिए तमिलनाडु सरकार और उसकी बिजली वितरण कंपनी टैनजेडको के साथ सहमति ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर तमिलनाडु के विद्युत, मद्य निषेध और आबकारी मंत्री श्री पी. थंगमणि भी उपस्थित थे।

उदय योजना में शामिल होने से तमिलनाडु को ब्याज लागत में बचत करके, एटी तथा सी और ट्रांसमिशन क्षति में कमी करके, ऊर्जा सक्षमता में सक्रिय होकर और कोयला सुधारों के माध्यम से लगभग 11000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा। राज्य ने इस अवसर पर सभी के लिए सातों दिन 24 घंटे बिजली देने के दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर किया। तमिलनाडु के उदय योजना में शामिल होने के साथ उदय योजना के अतंर्गत देश की बिजली वितरण कंपनियों का 92 प्रतिशत ऋण कवर कर लिया गया है।

उदय योजना के अंतर्गत सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके राज्य सरकार टैनजेडको के 30,420 करोड़ रुपये ऋण का 75 प्रतिशत हिस्सा ले लिया है। इस योजना में शेष ऋण के पुनः मूल्य निर्धारण या स्टेट गारंटीड डिस्कॉम बांड औसत वर्तमान ब्याज दर से 3-4 प्रतिशत कम कूपन दरों पर जारी करने पर तमिलनाडु उधारी में कमी तथा शेष उधारी कर ब्याज दर में कमी से 950 करोड़ रूपये की बचत करेगा।

उदय योजना :

भारत सरकार ने 20 नवम्बर, 2015 को उदय योजना लांच की। इसका उद्देश्य ऋण बोझ से दबी वितरण कंपनियों में वित्तीय स्थायित्व लाना है। तमिलनाडु के इस योजना में शामिल होने के साथ 21 राज्य उदय योजना में शामिल हो गए हैं।

इस अवसर पर विद्युत मंत्रालय के सचिव श्री पी. के. पुजारी, तमिलनाडु सरकार के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) श्री राजीव रंजन , ग्रामीण विद्युतिकरण निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. पी. वी. रमेश, टैनजेडको के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. एम. साई कुमार तथा विद्युत मंत्रालय और तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

2) प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार-2017

14वें प्रवासी भारतीय दिवस समारोह का आयोजन 07-09 जनवरी, 2017 में बैंगलोर में किया जा रहा है। वर्ष 2003 से प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन प्रति वर्ष आयोजित किया जा रहा है और हम पहले संस्करण से ही अपने प्रवासियों को सम्मानित कर रहे हैं।

पिछले वर्ष के अंत में यह निर्णय किया गया था कि प्रवासी भारतीय दिवस सम्‍मेलनों का आयोजन हर दो वर्ष के अंतराल में किया जाएगा। इसलिए, प्रवासी भारतीय दिवस 2017 में प्रदान किये जाने वाले पुरस्कारों की संख्या दोगुना होकर 30 हो गई है। इसके अलावा निर्णायक-सह-पुरस्कार समिति दिये जाने वाले क्षेत्रों में व्यक्तियों के लिए अपने विवेकानुसार छह और नामांकन कर सकती हैं। इस वर्ष निर्णायक समिति ने भारत के विकास की दिशा में योगदान, भारत में धर्मार्थ कार्य और जनहितैषी निवेश पर उपलब्धियों के लिए प्रवासी के योगदान पर भी विचार किया है।

सभी पात्र श्रेणियों के प्रवासी भारतीयों/संगठनों से निर्धारित प्रारूप में नामांकन आमंत्रित किये गये थे। मंत्रालय में नामांकन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 29 अगस्त, 2016 थी।

माननीय उप राष्ट्रपति की अध्यक्षता में निर्णायक-सह-पुरस्कार समिति ने पीबीएसए के लिए सभी नामांकनों पर विचार किया। दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र पाए गए नामांकनों की सूची 123 और अन्‍य नामांकनों की सूची 55 थी, जिन्‍हें समिति के समक्ष विलंब से भेजा गया था। नामांकनों की प्राथमिक स्‍तर पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक जांच समिति द्वारा जांच की गई।

प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार के लिए निर्णायक-सह-पुरस्कार समिति (पीबीएसए) में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं :


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उपराष्‍ट्रपति- अध्यक्ष
माननीय विदेश मंत्री, उपाध्यक्ष
श्री स्वप्न दासगुप्ता, संसद सदस्य, राज्यसभा
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
डॉ एस.जयशंकर, विदेश सचिव
श्री राजीव महर्षि, गृह सचिव
श्री सतीश चंद्रा, संयुक्त राज्य अमरीका में भारत के पूर्व राजदूत
सुश्री इंद्र नूई, मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी, पेप्सिको
श्री यूसुफ अली एम.ए. प्रबंध निदेशक, लुलु ग्रुप ऑफ इं‍डस्‍ट्रीज, संयुक्त अरब अमीरात
श्री श्याम परांदे, सचिव, अंतर राष्ट्रीय सहयोग परिषद
श्री डी. एम मुले, सचिव (ओआईए और सीपीवी) और सदस्य सचिव

निर्णायक समिति के सदस्यों ने सभी पात्र नामांकनों पर विचार किया और प्रासंगिक जानकारी को समिति के समक्ष रखा। विस्तृत विचार विमर्श के बाद, 20 दिसम्बर 2016 को समिति के द्वारा प्रवासी भारतीय सम्‍मान पुरस्‍कार, 2017 के लिए निर्णायक-सह-पुरस्कार समिति ने 30 प्रत्याशियों की सर्वसम्मति सेपुरस्‍कार के लिए सिफारिश की

3) देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में दो प्रतिशत की कमी आई

05 जनवरी, 2017 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 89.384 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 57 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 126 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 98 प्रतिशत है।

इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति

उत्तरी क्षेत्र

उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 8.1 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 45 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 53 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 54 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

पूर्वी क्षेत्र

पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 14.75 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 78 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 58 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 69 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

पश्चिमी क्षेत्र

पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 18.35 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 68 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थियति 40 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 64 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

मध्य क्षेत्र

मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धक संग्रहण 30.70 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 73 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 55 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

दक्षिणी क्षेत्र

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्धण संग्रहण 17.45 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 34 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 31 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 56 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कमतर है।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), तेलंगाना एवं कर्नाटक शामिल हैं। इसी अवधि के लिए पिछले साल की तुलना में कम भंडारण होने वाले राज्य हैं - हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु।

4) तृतीय जल मंथन का आयोजन आगामी 13 जनवरी को

जल प्रबंधन क्षेत्र के विभिन्‍न मुद्दों के समाधान के उद्देश्‍य से विभिन्‍न हितधारकों के बीच व्‍यापक विचार-विमर्श के लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय ने नई दिल्‍ली में आगामी 13 जनवरी को ‘’जल मंथन-3’’ नाम से एक राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन किया है। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती इस सम्‍मेलन का उद्घाटन करेगी।

इस एक दिवसीय सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, नदी घाटी प्रबंधन, नदी संरक्षण और पारिस्थितिकी, बाढ़ प्रबंधन जल प्रयोग कुशलता और सहभागिता सिंचाई प्रबंधन जैसे विषयों पर व्‍यापक विचार-विमर्श होगा। सम्‍मेलन में मंत्रालय की नीतियों को लोगों के प्रति ज्‍यादा मित्रवत बनाने और राज्‍यों की आवश्‍यकताओं के प्रति ज्‍यादा उत्तरदायी बनाने पर ध्‍यान दिया जाएगा।

इस सम्‍मेलन में केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों के मंत्री, कुछ राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों के मुख्‍यमंत्री, राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों के सिंचाई/जल संसाधन मंत्री, जल प्रबंधन क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और केंद्र एवं राज्य सरकारों के सभी संबंधित विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारी भाग लेंगे। सम्‍मेलन में लगभग 700 लोगों के भाग लेने की उम्‍मीद है।

उल्‍लेखनीय है कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जुड़े विभिन्‍न पक्षों के बीच व्‍यापक विचार विमर्श की आवश्‍यकता पर बल दिया है ताकि जल संसाधन विकास को पर्यावरण, वन्‍य जीवों और विभिन्‍न सामाजिक एवं सास्‍कृतिक पद्धतियों के साथ बेहतर ढ़ग से जोड़ा जा सके। जल मंथन कार्यक्रमों का आयोजन इसी उद्देश्‍य से किया जाता है। नवंबर 2014 और फरवरी 2016 में आयोजित पहले दो जल मंथन कार्यक्रम बहुत सफल रहे।

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उदाहरण :--
87 का पहाड़ा
पहले 8 का पहाड़ा उसके बाजू मॆ 7 का पहाड़ा लिखें.

  8            7                    87
16         14    (16+1)    174
24         21    (24+2)    261
32         28    (32+2)    348
40         35    (40+3)    435
48         42    (48+4)    522
56         49    (56+4)    609
64         56    (64+5)    696
72         63    (72+6)    783
80         70    (80+7)    870

पहले अंक के पहाड़े मॆ दूसरे अंक के पहाड़े का प्रथम अंक जोड़े ,और दूसरे अंक के पहाड़े का दूसरा अंक हूबहू रख दें.इस प्रकार आप 10 से 99 तक का पहाड़ा बना सकते है |



दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीट लाइट रिप्लेसमेंट कार्यक्रम को राष्ट्र को समर्पित

दक्षिण दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में दो लाख स्ट्रीट लाइट बदले गए

दोषपूर्ण स्ट्रीट लाइट की शिकायतों को दूर करने के लिए एसएलएनपी अनुप्रयोग शुरू किया जाएगा

केन्‍द्रीय बिजली,कोयला, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और खान राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल राष्‍ट्रीय स्‍ट्रीट लाइट कार्यक्रम (एसएलएनपी) को कल 9 जनवरी, 2017 को देश को समर्पित।

यह काय्रक्रम अभी दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में चल रहा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्‍ट्रीट लाइट प्रतिस्‍थापन कार्यक्रम है। इसका क्रियान्‍वयन ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा किया जा रहा है। ईईएसएल भारत सरकार का बिजली मंत्रालय के तहत काम करने वाला एक संयुक्‍त उपक्रम है।

इस समय एसएलएनपी कार्यक्रम पंजाब, हिमाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा,झारखंड,छत्‍तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल,गोवा महाराष्‍ट्र ,गुजरात और राज्‍स्‍थान में चल रहा है। अब तक पूरे देश में 15.36 लाख स्‍ट्रीट लाइटस एलईडी बल्‍बों द्वारा प्रतिस्‍थापित किए जा चुके हैं। परिणाम स्‍वरूप 20.35 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत हुई है। इस कारण 50.71 मेगावाट क्षमता को टाले जाने से प्रति वर्ष 1.68 लाख टन ग्रीन हाउस गैस के उत्‍सर्जन में कमी आई है।

भारत में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के ऊर्जा दक्षता बाजार के होने का अनुमान है। इससे वर्तमान उपभोग में अभिनव व्‍यापार और क्रियान्‍वयन के माध्‍यम से 20 प्रतिशत ऊर्जा की बचत होने की संभावना है।

एसएलएनपी के तहत दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में अकेले दो लाख से अधिक स्‍ट्रीट लाइट प्रतिस्‍थापित किए गए हैं। इस कार्यक्रम के माध्‍यम से दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र में प्रतिवर्ष 2.65 करोड़ मेगावाट बिजली की बचत होती है। इससे 6.6 मेगावाट क्षमता को टालने में मदद मिली है जिस कारण प्रति दिन 22,000 टन ग्रीन हाउस गैस को कम करने में मदद मिली है। इसके साथ ही दिल्‍ली में इस र्काक्रम के अगले चरण-II में पार्कों को ध्‍यान में ध्‍यान में रखते हुए 75,000 और स्‍ट्रीट लाइट लगाने के लिए ईईएसएल ने बीएसईएस और दक्षिणी दिल्‍ली नगर निगम के साथ एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्‍ताक्षर किए हैं।

 दक्षिणी  दिल्‍ली नगर निगम क्षेत्र की इस परियोजना में ईईएसएल विभिन्‍न स्रोतों से शिकायतों को दूर कर रहा है। उदाहरण के लिए बीएसईएस हेल्‍पलाइन से पंजीकृत, ईईएसएल के रात्रि गश्‍त दल,मोबाइल वैन, सोशल मीडिया और पार्षदों सहित अन्‍य स्रोतों से प्राप्‍त शिकायतों के जरिये।

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